2026-09-19विप्लव विकास
हमें युवाओं से संवाद की भाषा भी बदलनी होगी। हमें उनसे यह कहने के बजाय कि "तुम आसानी से बहकावे में आ जाते हो", यह कहना होगा कि “तुम्हारे पास भ्रामक सूचनाओं को रोकने की सबसे बड़ी क्षमता है।”
यहीं से 'डिजिटल डिफेंस फोर्स' का विचार जन्म लेता है। इसके लिए किसी वर्दी, सीमा-चौकी या औपचारिक भर्ती की आवश्यकता नहीं है।
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